Showing posts with label ghazal. Show all posts
Showing posts with label ghazal. Show all posts

Friday, September 10, 2010

फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था



फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था,
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था

वो के खुशबु की तरह फैला था मेरे चार-सूँ,
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था 

रात भर पिछली ही आहट कान में आती रही
झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था

खुद चढ़ा रखे थे तन पर अजनबियत के गिलाफ़
वरना कब इक-दूसरे को हमने पहचाना न था

याद करके और भी तक़लीफ़ होती थी अदीम
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चारा न था

Friday, December 04, 2009

जो तू हँसी है तो हर एक अधर पे रहना सीख

जो तू हँसी है तो हर एक अधर पे रहना सीख
अगर है अश्क तो औरों के गम में बहना सीख

अगर है हादसा तो दिल से दूर-दूर ही रह
अगर है दिल तो सभी हादसों को सहना सीख

अगर तू कान है तो झूठ के करीब न जा
अगर तू होंठ है तो सच बात को ही कहना सीख

अगर तू फूल है तो खिल सभी के आँगन में
अगर तू ज़ुल्म की दीवार है तो ढहना सीख

अहम् नही है तो आ तू 'कुंवर' के साथ में चल
अहम् अगर है तो फिर अपने घर में रहना सीख

- कुंवर बेचैन
(आँधियों धीरे चलो)

काफ़ी समय से कुंवर बेचैन को पढ़ना चाहता था। और इस बार साहित्य अकादेमी लाइब्रेरी में ये गजलों का संग्रह मिला तो रोक नही पाया ख़ुद को इसे इश्यु कराने से! एक और भी किताब लाया हूँ, अज्ञेय की संपूर्ण कहानियाँ। पता नही कब पढ़ पाऊँगा। कुछ अच्छा मिला तो ज़रूर यहाँ पोस्ट करूंगा।
अच्छा लगता है जब आप सब इस ब्लॉग पर आकर ये सब पढ़ते हैं और अपने विचार लिखते हैं। शुक्रिया :)

-आदि

Monday, November 30, 2009

कहते हो न देंगे हम दिल

कहते हो, देंगे हम दिल, दिल अगर पड़ा पाया
दिल कहाँ, की गुम कीजे, हमने मुद्दा पाया
इश्क से, तबियत ने, ज़ीस्त* का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई, दर्द--बेदवा पाया
*दोस्तदारे-दुश्मन , एतिमादे-दिल मालूम
आह बे असर देखि, नाला -रसा* पाया
सादगी--पुरकारी*, बेखुदी--हुशियारी
हुस्न को तगाफुल* में, जुरअत-आज़मा* पाया
गुंचा फिर लगा खिलने, आज हमने अपना दिल
खून किया हुआ देखा, गुम किया हुआ पाया
हाले-दिल नही मालूम, लेकिन इस कदर यानी
हमने बारहा ढूँढा, तुमने बारहा पाया
*शोर-पन्द-नासेह ने ज़ख्म पर नमक छिड़का
आपसे कोई पूछे, तुमने क्या मज़ा पाया


- ग़ालिब

ज़ीस्त - ज़िन्दगी; दोस्तदारे-दुश्मन - दुश्मन का दोस्त; नाला -रसा - न पहुँचने वाला; पुरकारी - चालाकी; तगाफुल - उदासीनता; जुर्रत-आजमा - धैर्य का परीक्षक; शोर-पन्द-नासेह - उपदेशक की कटुता.

Wednesday, August 20, 2008

आँख भर आए तो

कोई अच्छा चेहरा नज़र आए तो
उधर जाते-जाते इधर आए तो

ये दिल यूँ तो बच्चों का बच्चा है पर
गुनाह कोई संगीन कर आए तो

चला तो हूँ मैं अपना घर छोड़ कर
मगर साथ में मेरा घर आए तो

कबूतर तेरा उड़ते-उड़ते अगर
मेरी टूटी छत पर उतर आए तो

सबब हो तो रोना भी अच्छा लगे
मगर बेसबब आँख भर आए तो

मुहम्मद अल्वी