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Saturday, November 19, 2011
Friday, December 04, 2009
जो तू हँसी है तो हर एक अधर पे रहना सीख
जो तू हँसी है तो हर एक अधर पे रहना सीख
अगर है अश्क तो औरों के गम में बहना सीख
अगर है हादसा तो दिल से दूर-दूर ही रह
अगर है दिल तो सभी हादसों को सहना सीख
अगर तू कान है तो झूठ के करीब न जा
अगर तू होंठ है तो सच बात को ही कहना सीख
अगर तू फूल है तो खिल सभी के आँगन में
अगर तू ज़ुल्म की दीवार है तो ढहना सीख
अहम् नही है तो आ तू 'कुंवर' के साथ में चल
अहम् अगर है तो फिर अपने घर में रहना सीख
अगर है अश्क तो औरों के गम में बहना सीख
अगर है हादसा तो दिल से दूर-दूर ही रह
अगर है दिल तो सभी हादसों को सहना सीख
अगर तू कान है तो झूठ के करीब न जा
अगर तू होंठ है तो सच बात को ही कहना सीख
अगर तू फूल है तो खिल सभी के आँगन में
अगर तू ज़ुल्म की दीवार है तो ढहना सीख
अहम् नही है तो आ तू 'कुंवर' के साथ में चल
अहम् अगर है तो फिर अपने घर में रहना सीख
- कुंवर बेचैन
(आँधियों धीरे चलो)
(आँधियों धीरे चलो)
काफ़ी समय से कुंवर बेचैन को पढ़ना चाहता था। और इस बार साहित्य अकादेमी लाइब्रेरी में ये गजलों का संग्रह मिला तो रोक नही पाया ख़ुद को इसे इश्यु कराने से! एक और भी किताब लाया हूँ, अज्ञेय की संपूर्ण कहानियाँ। पता नही कब पढ़ पाऊँगा। कुछ अच्छा मिला तो ज़रूर यहाँ पोस्ट करूंगा।
अच्छा लगता है जब आप सब इस ब्लॉग पर आकर ये सब पढ़ते हैं और अपने विचार लिखते हैं। शुक्रिया :)
-आदि
अच्छा लगता है जब आप सब इस ब्लॉग पर आकर ये सब पढ़ते हैं और अपने विचार लिखते हैं। शुक्रिया :)
-आदि
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